अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस (17 जुलाई): वैश्विक न्याय एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को सुदृढ़ करने का दिवस
अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस प्रतिवर्ष 17 जुलाई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय न्याय, मानवाधिकारों की रक्षा तथा युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस 17 जुलाई 1998 को अपनाई गई रोम संविधि (Rome Statute) की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) की स्थापना हुई। ICC का मुख्यालय हेग (नीदरलैंड) में स्थित है और यह नरसंहार, युद्ध अपराध तथा मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई करता है। भारत रोम संविधि का पक्षकार नहीं है, फिर भी वह अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखता है।
अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस (International Justice Day) प्रतिवर्ष 17 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था, मानवाधिकारों की रक्षा, युद्ध अपराधों, नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराधों तथा आक्रामकता के अपराध के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
17 जुलाई का महत्व
17 जुलाई 1998 को इटली के रोम (Rome) में रोम संविधि (Rome Statute) को अपनाया गया था। इसी संधि के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (International Criminal Court–ICC) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC)
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) की स्थापना 1 जुलाई 2002 को रोम संविधि के लागू होने के बाद हुई। इसका मुख्यालय हेग (The Hague), नीदरलैंड में स्थित है। ICC का कार्य नरसंहार (Genocide), मानवता के विरुद्ध अपराध (Crimes against Humanity), युद्ध अपराध (War Crimes) तथा आक्रामकता के अपराध (Crime of Aggression) जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए व्यक्तिगत आपराधिक उत्तरदायित्व तय करना है।
अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस का महत्व
यह दिवस कानून के शासन (Rule of Law), मानवाधिकारों के संरक्षण, पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा दण्डमुक्ति (Impunity) की प्रवृत्ति को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल देता है। साथ ही यह देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने तथा वैश्विक शांति एवं न्याय को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।
भारत और ICC
भारत रोम संविधि (Rome Statute) का हस्ताक्षरकर्ता या पक्षकार (State Party) नहीं है, इसलिए वह ICC का सदस्य नहीं है। भारत का मत है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में राष्ट्रीय संप्रभुता, निष्पक्षता तथा व्यापक वैश्विक सहमति का संतुलन आवश्यक है। फिर भी भारत अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दिवस, रोम संविधि, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC), अंतरराष्ट्रीय न्याय, मानवाधिकार, युद्ध अपराध तथा वैश्विक शासन (Global Governance) से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। ICC और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के बीच अंतर भी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।