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ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2: भारत की समुद्री सुरक्षा कूटनीति और हिंद महासागर में रणनीतिक नेतृत्व

Published 23 July 2026

भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 नामक बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास का शुभारंभ किया है, जिसमें 26 देशों के 254 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। यह अभ्यास संयुक्त समुद्री बल (CMF) और संयुक्त कार्य बल-154 (CTF-154) के सहयोग से क्षमता निर्माण, अंतरसंचालनीयता तथा समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 2026 में पहली बार इस अभ्यास की मेजबानी भारत कर रहा है तथा भारतीय नौसेना वर्तमान में CTF-154 का नेतृत्व भी कर रही है। यह पहल भारत की SAGAR नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति तथा हिंद महासागर क्षेत्र में 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत करती है।

भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 (Operation Southern Readiness 26-2) का शुभारंभ किया है। यह अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा संयुक्त समुद्री बल (Combined Maritime Forces-CMF) तथा संयुक्त कार्य बल 154 (Combined Task Force-154, CTF-154) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें 26 देशों के 254 प्रतिनिधि, 74 प्रशिक्षक, चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि तथा समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 क्या है?

यह एक बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं एवं समुद्री एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण (Capacity Building), अंतरसंचालनीयता (Interoperability) तथा परिचालन समन्वय (Operational Coordination) को सुदृढ़ करना है। अभ्यास के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण, टेबल-टॉप एक्सरसाइज, सिमुलेशन और विशेषज्ञों के व्याख्यान के माध्यम से समुद्री सुरक्षा से जुड़े उभरते खतरों से निपटने की क्षमता विकसित की जाती है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व

वर्ष 2026 का यह संस्करण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस का आयोजन भारत में किया जा रहा है। दक्षिणी नौसेना कमान इसकी मेजबानी कर रही है तथा वर्तमान में भारतीय नौसेना CTF-154 का नेतृत्व भी कर रही है। यह भारत की सागर (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) नीति, इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण तथा हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) में 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका को और सुदृढ़ करता है।

संयुक्त कार्य बल 154 (CTF-154) की भूमिका

CTF-154 संयुक्त समुद्री बल (CMF) के अंतर्गत स्थापित एक बहुराष्ट्रीय टास्क फोर्स है, जिसका मुख्य उद्देश्य समुद्री क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण सहयोग तथा साझेदार देशों की परिचालन दक्षता को बढ़ाना है। इसके प्रमुख कार्यों में नौसैनिक प्रशिक्षण, सूचना साझाकरण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) तथा समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। भारतीय नौसेना का इसका नेतृत्व करना वैश्विक समुद्री सुरक्षा ढांचे में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व

यह समाचार GS Paper-II (अंतरराष्ट्रीय संबंध) तथा GS Paper-III (रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा) दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से इंडो-पैसिफिक रणनीति, हिंद महासागर की भू-राजनीति, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री डकैती (Piracy), अवैध तस्करी, समुद्री आतंकवाद, समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) तथा बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग जैसे विषयों को समझा जा सकता है। प्रारंभिक परीक्षा में CMF, CTF-154, SAGAR तथा भारतीय नौसेना से संबंधित तथ्य पूछे जा सकते हैं।

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