अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई): वैश्विक बाघ संरक्षण एवं भारत की ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ पहल
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में वैश्विक बाघ संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी। बाघ एक शीर्ष शिकारी (Apex Predator) एवं की-स्टोन प्रजाति (Keystone Species) है, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया और वर्तमान में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) इसके संरक्षण कार्यों का संचालन करता है; भारत विश्व के लगभग 75% जंगली बाघों का आवास है। बाघ संरक्षण के समक्ष आवास विनाश, अवैध शिकार, मानव–वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ हैं, जिनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक संरक्षण, वन्यजीव गलियारों और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में हुई थी। इसका उद्देश्य विश्वभर में बाघों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास (Habitat) की सुरक्षा तथा अवैध शिकार (Poaching) और वन्यजीव तस्करी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस वैश्विक स्तर पर बाघों की घटती संख्या को रोकने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए समर्पित है।
बाघ संरक्षण का महत्व
बाघ (Tiger) एक शीर्ष शिकारी (Apex Predator) तथा की-स्टोन प्रजाति (Keystone Species) है, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाघों की उपस्थिति स्वस्थ वनों, समृद्ध जैव विविधता और पर्याप्त शिकार प्रजातियों का संकेत मानी जाती है। इसलिए बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति का संरक्षण नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु संतुलन की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
भारत में बाघ संरक्षण की प्रमुख पहल
भारत ने 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य बाघों एवं उनके आवास का संरक्षण करना था। वर्तमान में इसका संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority–NTCA) द्वारा किया जाता है। भारत में बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves) का नेटवर्क निरंतर विस्तारित हुआ है और देश आज विश्व के लगभग 75% जंगली बाघों का आवास है। बाघों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप, GIS, ड्रोन और वैज्ञानिक गणना जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
प्रमुख चुनौतियाँ एवं संरक्षण उपाय
बाघ संरक्षण के समक्ष आवास का क्षरण (Habitat Loss), वन विखंडन (Fragmentation), मानव–वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी तथा जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) का संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, तकनीक आधारित निगरानी, सीमा-पार सहयोग तथा सख्त कानूनी प्रवर्तन आवश्यक है। सतत संरक्षण प्रयासों से ही बाघों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस, प्रोजेक्ट टाइगर, NTCA, बाघ अभयारण्य, ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम, जैव विविधता संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper-III) में इसे जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय शासन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, सतत विकास तथा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।