60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार 2025: तमिल साहित्यकार आर. वैरामुथु सम्मानित
प्रसिद्ध तमिल कवि, गीतकार एवं लेखक आर. वैरामुथु को वर्ष 2025 का 60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार नई दिल्ली में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रदान किया गया। वे 24 वर्षों बाद तमिलनाडु से यह सम्मान प्राप्त करने वाले तीसरे साहित्यकार बने हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसकी स्थापना 1961 में हुई थी और यह आजीवन साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है। आर. वैरामुथु को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों एवं तमिल साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
प्रसिद्ध तमिल कवि, गीतकार एवं लेखक आर. वैरामुथु को वर्ष 2025 का 60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली में आयोजित समारोह में भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से दिया गया। वे 24 वर्षों बाद तमिलनाडु से यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने वाले तीसरे साहित्यकार बने हैं।
आर. वैरामुथु का साहित्यिक योगदान
आर. वैरामुथु समकालीन तमिल साहित्य के प्रमुख रचनाकार हैं। उन्होंने कविता, उपन्यास, निबंध, गीत एवं सामाजिक-सांस्कृतिक लेखन के माध्यम से तमिल साहित्य को समृद्ध किया है। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, सामाजिक न्याय, प्रकृति, मानवीय संवेदनाएँ तथा तमिल संस्कृति का व्यापक चित्रण मिलता है। उनकी प्रसिद्ध कृति 'कल्लिकट्टु इथिकासम' के लिए उन्हें 2003 का साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।
ज्ञानपीठ पुरस्कार: प्रमुख तथ्य
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है। इसकी स्थापना 1961 में हुई तथा इसे भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रतिवर्ष भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा के साहित्यकार को उनके आजीवन साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। पुरस्कार में 11 लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र तथा देवी वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है।
तमिल साहित्य के लिए उपलब्धि
आर. वैरामुथु ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार हैं। इससे पूर्व अकिलन (1975) तथा जयकांतन (2002) को यह सम्मान प्राप्त हुआ था। यह उपलब्धि भारतीय साहित्य में तमिल भाषा की समृद्ध परंपरा और उसके राष्ट्रीय योगदान को पुनः रेखांकित करती है।
भारतीय ज्ञानपीठ का महत्व
भारतीय ज्ञानपीठ की स्थापना 1944 में हुई थी। यह संस्था भारतीय भाषाओं के संरक्षण, साहित्यिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहन, लेखकों के सम्मान तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए कार्य करती है। ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य में सर्वोच्च उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ, संविधान की आठवीं अनुसूची, भारतीय भाषाएँ तथा प्रमुख साहित्यकार महत्वपूर्ण विषय हैं। पुरस्कारों की स्थापना, उद्देश्य, पात्रता, प्रदान करने वाली संस्था तथा हाल के पुरस्कार विजेताओं से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।