‘भार्गवास्त्र’ (Bhargavastra): भारत की स्वदेशी बहुस्तरीय ड्रोन-रोधी रक्षा प्रणाली
भार्गवास्त्र (Bhargavastra) भारत की स्वदेशी Counter-Drone Weapon System है, जिसका प्रदर्शन 24 जुलाई 2026 को नागपुर में Make-II परियोजना के अंतर्गत भारतीय सेना के समक्ष किया गया। यह वाहन-आधारित प्रणाली रडार, EO/IR सेंसर, RF डिटेक्टर और C4I तकनीक की सहायता से ड्रोन, यूएवी और लोइटरिंग म्यूनिशन का वास्तविक समय में पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसकी दो-स्तरीय रक्षा प्रणाली में ड्रोन झुंडों के लिए अनिर्देशित मिनी-रॉकेट तथा सटीक हमलों के लिए 2.5 किमी तक मार करने वाली स्मार्ट मिनी-मिसाइलें शामिल हैं। Soft-Kill और Hard-Kill दोनों क्षमताओं से लैस यह प्रणाली भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा, आधुनिक ड्रोन युद्ध क्षमता और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करती है।
भार्गवास्त्र (Bhargavastra) भारत में विकसित एक स्वदेशी Counter-Drone Weapon System है, जिसे शत्रु ड्रोन, यूएवी (UAV), लोइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munitions) तथा अन्य निम्न-ऊंचाई वाले हवाई खतरों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित किया गया है। इसका प्रदर्शन 24 जुलाई 2026 को नागपुर में भारतीय सेना के समक्ष Make-II परियोजना के अंतर्गत किया गया। यह प्रणाली भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता तथा आत्मनिर्भर भारत पहल को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भार्गवास्त्र की प्रमुख विशेषताएँ
भार्गवास्त्र एक वाहन-आधारित (Vehicle Mounted) मोबाइल प्रणाली है, जिसमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर, निष्क्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर तथा C4I (Command, Control, Communications, Computers and Intelligence) तकनीक का समावेश किया गया है। यह प्रणाली एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क के माध्यम से हवाई लक्ष्यों की वास्तविक समय (Real-time) में पहचान, ट्रैकिंग तथा अवरोधन (Interception) करने में सक्षम है।
कार्यप्रणाली एवं बहुस्तरीय रक्षा तंत्र
भार्गवास्त्र दो-स्तरीय (Two-layered) रक्षा प्रणाली पर आधारित है। पहली परत में 20 मीटर मारक क्षेत्र वाले अनिर्देशित मिनी-रॉकेट का उपयोग किया जाता है, जो ड्रोन के झुंड (Drone Swarm) को निष्क्रिय करने में प्रभावी हैं। दूसरी परत में स्मार्ट मिनी-मिसाइलें शामिल हैं, जो लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन पर सटीक हमला कर सकती हैं। यह प्रणाली 10 किलोमीटर तक बड़े यूएवी तथा 6 किलोमीटर तक छोटे ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है।
सॉफ्ट-किल एवं हार्ड-किल क्षमता
भार्गवास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी Soft-Kill और Hard-Kill दोनों प्रकार की क्षमताएँ हैं। Soft-Kill तकनीक में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare), रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमिंग तथा संचार व्यवधान के माध्यम से ड्रोन को भ्रमित या निष्क्रिय किया जाता है। वहीं Hard-Kill तकनीक में निर्देशित मिनी-मिसाइलों और अनिर्देशित रॉकेटों द्वारा ड्रोन को भौतिक रूप से नष्ट किया जाता है। यह संयोजन आधुनिक ड्रोन युद्ध की जटिल चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में Counter-Drone Technology, Make-II परियोजना, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा अनुसंधान एवं स्वदेशी रक्षा प्रणालियों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper-III) में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आधुनिक युद्ध, ड्रोन युद्ध (Drone Warfare), रक्षा आधुनिकीकरण तथा स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के संदर्भ में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह विषय भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार दोनों से जुड़ा हुआ है।