राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) की शुरुआत: भारत के संगठित स्वर्ण बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) में कारोबार शुरू किया है, जिससे निवेशकों को SEBI द्वारा विनियमित व्यवस्था के तहत सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से सोने में निवेश की सुविधा मिलेगी। EGR, वॉल्ट में सुरक्षित रखे गए भौतिक सोने के स्वामित्व का इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण है, जिसे डीमैट खाते में रखा और स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा जा सकता है। यह व्यवस्था सुरक्षित भंडारण, मानकीकृत गुणवत्ता, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और उच्च तरलता जैसे लाभ प्रदान करती है। EGR प्रणाली भारत के स्वर्ण बाजार को अधिक संगठित, पारदर्शी और आधुनिक बनाकर संस्थागत निवेश तथा औपचारिक बुलियन बाजार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (Electronic Gold Receipts – EGR) में कारोबार प्रारंभ किया है। यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा विनियमित वॉल्ट प्रबंधकों के माध्यम से संचालित होगी। इस पहल का उद्देश्य भारत के स्वर्ण (Bullion) बाजार को अधिक पारदर्शी, संगठित एवं आधुनिक बनाना तथा निवेशकों को सुरक्षित एवं विनियमित माध्यम से सोने में निवेश की सुविधा उपलब्ध कराना है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) क्या हैं?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) ऐसी प्रतिभूतियाँ (Securities) हैं, जो SEBI द्वारा विनियमित वॉल्ट में सुरक्षित रखे गए मानक शुद्धता वाले भौतिक सोने के स्वामित्व का इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण प्रदान करती हैं। इन्हें डीमैट खाते में रखा जाता है तथा स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह खरीदा और बेचा जा सकता है। निवेशक आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इन्हें भौतिक सोने में भी परिवर्तित (Redeem) कर सकते हैं।
EGR की प्रमुख विशेषताएँ
अंतर्निहित परिसंपत्ति (Underlying Asset) भौतिक सोना है।
सोने का भंडारण SEBI-पंजीकृत वॉल्ट प्रबंधकों द्वारा किया जाता है।
EGR का स्वामित्व डीमैट खाते में सुरक्षित रहता है।
इनका कारोबार राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर किया जाता है।
प्रत्येक EGR निर्धारित शुद्धता (Purity) एवं गुणवत्ता मानकों वाले वास्तविक सोने द्वारा समर्थित होता है।
निवेशकों एवं बाजार के लिए महत्व
EGR व्यवस्था निवेशकों को सुरक्षित भंडारण, पारदर्शी मूल्य निर्धारण, मानकीकृत गुणवत्ता, उच्च तरलता (Liquidity) तथा भौतिक सोने के रख-रखाव से मुक्ति प्रदान करती है। इसके माध्यम से चोरी, नकली सोने तथा भंडारण संबंधी जोखिमों में कमी आती है और निवेश प्रक्रिया अधिक सरल एवं विश्वसनीय बनती है।
भारत के स्वर्ण बाजार पर प्रभाव
भारत विश्व के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में से एक है, जहाँ स्वर्ण व्यापार का बड़ा भाग लंबे समय से असंगठित क्षेत्र में होता रहा है। EGR प्रणाली संगठित बुलियन बाजार के विकास, मूल्य खोज (Price Discovery), बाजार एकीकरण, संस्थागत निवेश को प्रोत्साहन, पारदर्शिता में वृद्धि तथा अनौपचारिक स्वर्ण व्यापार पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
UPSC के लिए महत्व
यह विषय पूंजी बाजार सुधार, वित्तीय क्षेत्र के विनियमन, SEBI की भूमिका, वस्तु एवं बुलियन बाजार, वित्तीय नवाचार तथा निवेशकों के संरक्षण से संबंधित है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में EGR, SEBI, डीमैट, वॉल्ट प्रबंधक तथा बुलियन बाजार से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा (GS Paper-III) में वित्तीय बाजार सुधार, पूंजी बाजार का आधुनिकीकरण, वित्तीय समावेशन तथा निवेशक संरक्षण के संदर्भ में यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।