पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2026: एस्टोनिया शीर्ष पर, भारत 176वें स्थान पर
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2026 में 177 देशों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का आकलन किया गया, जिसमें एस्टोनिया 74.79 अंकों के साथ प्रथम तथा भारत 22.46 अंकों के साथ 176वें स्थान पर रहा। यह सूचकांक जलवायु परिवर्तन, वायु गुणवत्ता, जैव विविधता, जल संसाधन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य सहित 12 श्रेणियों एवं 47 संकेतकों के आधार पर देशों का मूल्यांकन करता है। इसे येल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल लॉ एंड पॉलिसी (YCELP) और कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जाता है। रिपोर्ट में भारत के समक्ष वायु प्रदूषण, वन संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण जैसी प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index-EPI) 2026 जारी किया गया है, जिसमें 177 देशों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। इस वर्ष एस्टोनिया 74.79 अंकों के साथ प्रथम स्थान पर रहा, जबकि भारत 22.46 अंकों के साथ 176वें स्थान पर है। यह सूचकांक जलवायु परिवर्तन, वायु गुणवत्ता, जल संसाधन, जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में देशों के प्रदर्शन का आकलन करता है।
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) क्या है?
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक एक वैश्विक डेटा-आधारित मूल्यांकन प्रणाली है, जो विभिन्न देशों की पर्यावरण संरक्षण नीतियों और उनके परिणामों का तुलनात्मक विश्लेषण करती है। इसे येल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल लॉ एंड पॉलिसी (YCELP), कोलंबिया विश्वविद्यालय के CIESIN तथा येल सेंटर फॉर जियोस्पेशियल सॉल्यूशंस द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाता है। यह सरकारों को पर्यावरणीय नीतियों की प्रभावशीलता मापने में सहायता प्रदान करता है।
EPI 2026 का मूल्यांकन ढांचा
EPI 2026 में 177 देशों का मूल्यांकन 12 पर्यावरणीय श्रेणियों और 47 संकेतकों के आधार पर किया गया है। इनमें जलवायु परिवर्तन शमन, वायु गुणवत्ता, जल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य, वन प्रबंधन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। यह मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों के अनुरूप देशों की प्रगति को भी दर्शाता है।
भारत का प्रदर्शन एवं प्रमुख चुनौतियाँ
भारत को EPI 2026 में 176वाँ स्थान प्राप्त हुआ, जो वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे निम्न स्थान है। रिपोर्ट के अनुसार भारत को वायु प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता, वन संरक्षण तथा पर्यावरणीय स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि भारत ने पूर्व में EPI की कार्यप्रणाली और डेटा संग्रह पद्धति पर आपत्ति जताते हुए इसकी रैंकिंग को पूरी तरह यथार्थपरक नहीं माना है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
EPI अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय सूचकांकों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में EPI से संबंधित संस्थाएँ, संकेतक, शीर्ष एवं निम्न रैंक वाले देश तथा SDGs और पेरिस समझौते से इसका संबंध पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में पर्यावरणीय शासन, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और भारत की पर्यावरणीय नीतियों के संदर्भ में इसका विश्लेषण महत्वपूर्ण है।