भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (IACS) के 150 वर्ष: भारत की वैज्ञानिक विरासत और अनुसंधान उत्कृष्टता का ऐतिहासिक सफर
भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (IACS) वर्ष 2026 में अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसकी स्थापना 29 जुलाई 1876 को डॉ. महेंद्रलाल सिरकार ने कोलकाता में की थी। इस संस्थान ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा देकर भारत के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। IACS की सबसे बड़ी उपलब्धि सी. वी. रमन द्वारा 1928 में रमन प्रभाव की खोज है, जिसके लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला और 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। वर्तमान में IACS, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रतिभा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (Indian Association for the Cultivation of Science - IACS) वर्ष 2026 में अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसकी स्थापना 29 जुलाई 1876 को डॉ. महेंद्रलाल सिरकार (Dr. Mahendralal Sircar) ने कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में की थी। इसका उद्देश्य भारत में मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा भारतीय वैज्ञानिकों को स्वतंत्र शोध के लिए मंच प्रदान करना था।
स्थापना एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
IACS की स्थापना बंगाल पुनर्जागरण (Bengal Renaissance) के दौर में हुई, जब भारत में शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और सामाजिक सुधारों का व्यापक विकास हो रहा था। औपनिवेशिक शासन के समय वैज्ञानिक अनुसंधान के सीमित अवसरों के बीच यह संस्थान भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र बनकर उभरा और आधुनिक भारतीय विज्ञान की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय विज्ञान में योगदान
पिछले 150 वर्षों में IACS ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान (Materials Science), जीव विज्ञान तथा अंतःविषयक अनुसंधान (Interdisciplinary Research) में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस संस्थान ने अनेक वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया, जिन्होंने भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया।
रमन प्रभाव एवं नोबेल पुरस्कार से संबंध
IACS की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (Sir C. V. Raman) द्वारा 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव (Raman Effect) की खोज है। इस खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया, जिससे वे विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम एशियाई वैज्ञानिक बने। इसी उपलब्धि की स्मृति में भारत में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) मनाया जाता है।
वर्तमान भूमिका एवं महत्व
वर्तमान में IACS, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology - DST) के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान के रूप में कार्य करता है। यह संस्थान अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा युवा वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बना रहा है।
UPSC Value Addition
भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (IACS) भारत की वैज्ञानिक विरासत, अनुसंधान उत्कृष्टता और नवाचार संस्कृति का प्रतीक है। इसी संस्थान से जुड़ी रमन प्रभाव जैसी विश्वप्रसिद्ध खोज ने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर स्थापित किया। IACS की 150वीं वर्षगांठ केवल एक संस्थान का उत्सव नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper), अनुसंधान-आधारित विकास, आत्मनिर्भर भारत, और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह विषय UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आधुनिक भारत तथा समसामयिकी के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है।