IIT कानपुर में ग्रीन हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र (ECOGEN): भारत की स्वच्छ ऊर्जा एवं नेट-ज़ीरो रणनीति को नई गति
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में ECOGEN (ग्रीन हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र) की स्थापना उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2024 के तहत की जाएगी, जिसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह केंद्र ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, उपयोग, सिस्टम इंटीग्रेशन तथा फ्यूल सेल जैसी उन्नत तकनीकों पर कार्य करेगा और उद्योग, अकादमिक संस्थानों तथा नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को मजबूत करेगा। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, औद्योगिक निवेश और कार्बन उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देगी। भारत को वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने तथा नेट-ज़ीरो उत्सर्जन और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में ग्रीन हाइड्रोजन के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence - ECOGEN: Centre of Excellence on Innovative and Integrated Ecosystem for Green Hydrogen) स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2024 के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। इसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, उपयोग एवं प्रणाली एकीकरण (System Integration) से संबंधित उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना तथा भारत को स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाना है।
ग्रीन हाइड्रोजन एवं ECOGEN का महत्त्व
ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जिसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से संचालित जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन नगण्य होता है। ECOGEN का उद्देश्य अनुसंधान एवं नवाचार को औद्योगिक अनुप्रयोगों से जोड़ना, कम लागत वाली हाइड्रोजन तकनीक विकसित करना तथा भारत में ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सुदृढ़ करना है। यह केंद्र अकादमिक संस्थानों, उद्योगों एवं नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र
ECOGEN एक बहु-विषयक (Interdisciplinary) अनुसंधान केंद्र होगा, जो ग्रीन हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के सभी प्रमुख चरणों पर कार्य करेगा। इसके मुख्य अनुसंधान क्षेत्रों में हाइड्रोजन उत्पादन, हाइड्रोजन भंडारण, हाइड्रोजन का औद्योगिक एवं ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग, तथा सिस्टम इंटीग्रेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सुरक्षित परिवहन, ईंधन कोशिकाओं (Fuel Cells) तथा ऊर्जा दक्षता से संबंधित तकनीकों पर भी अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की नीतियों से संबंध
यह पहल उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2024 तथा भारत सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसका लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक निवेश, अनुसंधान एवं विकास (R&D), कौशल विकास, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। यह पहल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और भारत को वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय GS Paper-III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं ऊर्जा सुरक्षा) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रोलिसिस, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नेट-ज़ीरो उत्सर्जन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) से संबंधित तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डीकार्बोनाइजेशन, हरित औद्योगिकीकरण तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़े विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।