अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस (International Self-Care Day): निवारक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की वैश्विक पहल
अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस प्रत्येक वर्ष 24 जुलाई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करना है। स्व-देखभाल में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक तनाव प्रबंधन, व्यक्तिगत स्वच्छता, समय पर स्वास्थ्य जांच और जिम्मेदार दवा उपयोग शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्व-देखभाल को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम मानता है। भारत में आयुष्मान भारत, फिट इंडिया आंदोलन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और ईट राइट इंडिया जैसी पहलें स्वस्थ जीवनशैली एवं निवारक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस (International Self-Care Day) प्रत्येक वर्ष 24 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अपने शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की नियमित देखभाल के प्रति जागरूक करना तथा निवारक स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) को बढ़ावा देना है। 24/7 (24 घंटे, सप्ताह के 7 दिन) स्वास्थ्य के प्रति सतत जागरूक रहने के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए यह तिथि चुनी गई है।
स्व-देखभाल (Self-Care) क्या है?
स्व-देखभाल से तात्पर्य उन गतिविधियों और व्यवहारों से है, जिनके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने का प्रयास करता है। इसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक तनाव का प्रबंधन, व्यक्तिगत स्वच्छता, समय पर स्वास्थ्य जांच, आवश्यक टीकाकरण तथा जिम्मेदार तरीके से दवाओं का उपयोग शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी स्व-देखभाल को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage-UHC) को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम मानता है।
उद्देश्य एवं महत्त्व
इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना, गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases-NCDs) की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम करना है। स्व-देखभाल के माध्यम से व्यक्ति समय रहते बीमारियों की पहचान कर सकता है, उपचार लागत कम कर सकता है तथा स्वस्थ एवं उत्पादक जीवन जी सकता है।
भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता
भारत में बढ़ते मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), हृदय रोग, मोटापा तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में स्व-देखभाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (Health and Wellness Centres), फिट इंडिया आंदोलन, ईट राइट इंडिया अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) तथा आयुष प्रणाली जैसी पहलें स्वस्थ जीवनशैली एवं निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करती हैं।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय GS Paper-II (स्वास्थ्य एवं सामाजिक क्षेत्र) तथा GS Paper-III (मानव विकास एवं स्वास्थ्य) के लिए महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC), गैर-संचारी रोग (NCDs), राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय दिवसों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में निवारक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य नीति तथा स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।