MoSPI ने GDP आकलन प्रणाली में किया बड़ा सुधार: WPI के स्थान पर PPI और डबल डिफ्लेशन पद्धति को अपनाने की घोषणा
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने वास्तविक GDP आकलन में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के स्थान पर उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) अपनाने तथा डबल डिफ्लेशन पद्धति लागू करने की घोषणा की है। संशोधित GDP श्रृंखला में आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है, जिससे अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना का बेहतर प्रतिबिंब मिलेगा। PPI उत्पादन स्तर पर प्राप्त वास्तविक कीमतों को दर्शाता है, जिससे Real GVA और GDP का अधिक सटीक आकलन संभव होगा, जबकि WPI का प्रकाशन जारी रहेगा। यह सुधार भारत की राष्ट्रीय आय लेखा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाते हुए नीति-निर्माण, आर्थिक विश्लेषण और निवेश निर्णयों को अधिक विश्वसनीय बनाएगा।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भारत की राष्ट्रीय आय लेखा प्रणाली (National Accounts System) में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए तिमाही एवं वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वास्तविक (Real) अनुमानों में, जहाँ लागू होगा, थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI) के स्थान पर उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index-PPI) को अपनाने की घोषणा की है। इस सुधार का उद्देश्य GDP अनुमानों की सटीकता बढ़ाना तथा भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) का महत्व
PPI उन कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है जो उत्पादकों को वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री पर प्राप्त होती हैं, जबकि WPI मुख्यतः थोक बाजार स्तर की कीमतों को दर्शाता है। PPI उत्पादन लागत और वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का अधिक यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है। भारत में PPI श्रृंखला उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जून 2026 में जारी की गई थी।
डबल डिफ्लेशन (Double Deflation) पद्धति का परिचय
MoSPI ने GDP आकलन के लिए डबल डिफ्लेशन पद्धति अपनाने का निर्णय लिया है। इस पद्धति में उत्पादन (Output) और इनपुट लागत (Input Cost) दोनों को अलग-अलग मूल्य सूचकांकों से मुद्रास्फीति-समायोजित किया जाता है। इसके आधार पर वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (Real GVA) का अधिक सटीक अनुमान प्राप्त होता है। यह पद्धति संयुक्त राष्ट्र की System of National Accounts (SNA) सहित अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप मानी जाती है।
आधार वर्ष एवं अन्य प्रमुख परिवर्तन
संशोधित GDP श्रृंखला में आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। आधार वर्ष में परिवर्तन से अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना, नए उद्योगों, उपभोग एवं निवेश के बदलते पैटर्न तथा तकनीकी प्रगति का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। हालांकि WPI का प्रकाशन जारी रहेगा, लेकिन GDP अपस्फीतिकारक (Deflator) के रूप में इसकी प्रमुख भूमिका समाप्त हो जाएगी। आवश्यकता अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का उपयोग भी जारी रहेगा।
सुधार का आर्थिक एवं नीतिगत महत्व
यह सुधार भारत के राष्ट्रीय आय आंकड़ों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय तुलनीयता को बढ़ाएगा। इससे नीति-निर्माताओं, निवेशकों, शोधकर्ताओं तथा केंद्रीय बैंक को अधिक सटीक आर्थिक संकेतक प्राप्त होंगे। बेहतर GDP अनुमान राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति, निवेश निर्णय, विकास योजनाओं और व्यापक आर्थिक विश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाएंगे।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय लेखांकन, GDP, GVA, मुद्रास्फीति, WPI, CPI, PPI, आधार वर्ष, MoSPI तथा DPIIT से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक विषय है। परीक्षा में WPI और PPI का अंतर, GDP Deflator, Double Deflation Method, आधार वर्ष परिवर्तन, राष्ट्रीय आय की गणना तथा भारत की सांख्यिकीय सुधार प्रक्रिया पर तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह विषय GS Paper-3 (Indian Economy) तथा आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट के अध्ययन के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।