सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और गेट्स MRI की साझेदारी – तपेदिक (TB) के विरुद्ध M72/AS01E वैक्सीन के वैश्विक उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Gates MRI) ने M72/AS01E तपेदिक (TB) वैक्सीन के निर्माण एवं वैश्विक आपूर्ति के लिए सहयोग समझौता किया है, जो चरण-III परीक्षण एवं नियामकीय स्वीकृतियों के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादित की जाएगी। M72/AS01E वयस्कों और किशोरों में फुफ्फुसीय टीबी की रोकथाम के लिए विकसित उन्नत वैक्सीन उम्मीदवार है, जो सफल होने पर लगभग 100 वर्षों में वयस्कों के लिए विकसित पहला नया टीबी टीका होगा। विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता SII 170 से अधिक देशों को टीकों की आपूर्ति करता है और यह साझेदारी भारत की ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगी। यह पहल WHO की End TB Strategy और SDG-3 के लक्ष्यों को समर्थन देने के साथ-साथ भारत की वैश्विक वैक्सीन अनुसंधान एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य नेतृत्व क्षमता को भी सुदृढ़ करेगी।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India - SII) और गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Gates Medical Research Institute - Gates MRI) ने M72/AS01E तपेदिक (Tuberculosis - TB) वैक्सीन के निर्माण एवं वैश्विक आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौता किया है। यदि वैक्सीन के चरण-III (Phase III) नैदानिक परीक्षण सफल रहते हैं तथा नियामक स्वीकृतियाँ प्राप्त हो जाती हैं, तो SII बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन करेगा। यह पहल विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में टीबी नियंत्रण को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
M72/AS01E वैक्सीन क्या है?
M72/AS01E वयस्कों एवं किशोरों में फुफ्फुसीय तपेदिक (Pulmonary Tuberculosis) की रोकथाम के लिए विकसित एक उन्नत वैक्सीन उम्मीदवार (Vaccine Candidate) है। इसे प्रारंभ में GlaxoSmithKline (GSK) द्वारा विकसित किया गया था और वर्तमान में Gates MRI इसके विकास एवं परीक्षण का नेतृत्व कर रहा है। यदि यह सफल होता है, तो यह पिछले लगभग 100 वर्षों में वयस्कों के लिए विकसित पहला नया टीबी टीका होगा और वर्तमान BCG (Bacillus Calmette–Guérin) वैक्सीन का महत्वपूर्ण पूरक बनेगा, जो मुख्यतः शिशुओं को गंभीर टीबी से सुरक्षा प्रदान करती है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की भूमिका
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे स्थित विश्व का मात्रा (Volume) के आधार पर सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है। यह 170 से अधिक देशों को टीकों की आपूर्ति करता है तथा पोलियो, खसरा, मेनिन्जाइटिस, इन्फ्लुएंजा, कोविड-19 सहित अनेक संक्रामक रोगों के टीकों के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाता है। यह नई साझेदारी भारत की वैश्विक वैक्सीन निर्माण क्षमता और 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' की पहचान को और मजबूत करती है।
वैश्विक स्वास्थ्य के लिए महत्व
तपेदिक आज भी विश्व की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत टीबी के सर्वाधिक बोझ वाले देशों में शामिल है। M72/AS01E वैक्सीन के सफल होने पर टीबी नियंत्रण, मृत्यु दर में कमी, WHO End TB Strategy तथा सतत विकास लक्ष्य (SDG-3: अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
SII की अन्य वैश्विक अनुसंधान पहलें
SII संक्रामक रोगों के विरुद्ध अगली पीढ़ी के टीकों के विकास में भी सक्रिय है। संस्थान ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के Jenner Institute एवं Oxford Vaccine Group के सहयोग से Bundibugyo Ebola वैक्सीन का चरण-I नैदानिक परीक्षण प्रारंभ किया है। इसके अतिरिक्त ब्राज़ील, मलेशिया और थाईलैंड में डेंगू वैक्सीन से संबंधित बहुराष्ट्रीय नैदानिक परीक्षण भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक वैक्सीन अनुसंधान में भारत की भूमिका और सुदृढ़ हुई है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य) तथा GS Paper-2 (स्वास्थ्य नीति एवं सामाजिक क्षेत्र) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में BCG Vaccine, M72/AS01E, WHO End TB Strategy, National TB Elimination Programme (NTEP), Gates MRI, Serum Institute of India तथा Phase-I, II एवं III Clinical Trials से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में टीबी उन्मूलन, वैक्सीन अनुसंधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना एवं भारत की वैक्सीन कूटनीति (Vaccine Diplomacy) पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।