सेंट्रल विस्टा का नया नाम ‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’: राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक परिसर की नई पहचान
भारत सरकार ने सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास क्षेत्र का नाम बदलकर "कर्तव्य भवन क्षेत्र" कर दिया है और सभी सरकारी दस्तावेजों में इसी नाम के उपयोग के निर्देश दिए हैं। यह परिवर्तन औपनिवेशिक विरासत से भारतीय दृष्टिकोण, सार्वजनिक सेवा और संवैधानिक कर्तव्यों की भावना को प्रदर्शित करता है। कर्तव्य भवन क्षेत्र में कर्तव्य पथ, साझा केंद्रीय सचिवालय तथा अन्य नए केंद्रीय प्रशासनिक भवन शामिल होंगे। यह परियोजना प्रशासनिक दक्षता, आधुनिक अवसंरचना, मंत्रालयों के बेहतर समन्वय और नई दिल्ली के दीर्घकालिक शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
भारत सरकार ने सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास क्षेत्र का आधिकारिक नाम बदलकर "कर्तव्य भवन क्षेत्र (Kartavya Bhavan Area)" अथवा "कर्तव्य भवन परिसर" कर दिया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने निर्देश दिया है कि अब सभी सरकारी दस्तावेजों, मंत्रालयों तथा आधिकारिक पत्राचार में "सेंट्रल विस्टा" के स्थान पर नए नाम का ही उपयोग किया जाएगा। यह परिवर्तन राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक क्षेत्र की नई पहचान को दर्शाता है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना क्या है?
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना भारत सरकार की प्रमुख शहरी एवं प्रशासनिक अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना, विभिन्न मंत्रालयों के लिए आधुनिक कार्यालय उपलब्ध कराना तथा प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाना है। इस परियोजना के अंतर्गत साझा केंद्रीय सचिवालय (Common Central Secretariat), नए सरकारी कार्यालय तथा आधुनिक नागरिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
कर्तव्य भवन क्षेत्र में क्या शामिल होगा?
नव नामित कर्तव्य भवन क्षेत्र में सभी कर्तव्य भवन (सरकारी कार्यालय परिसर), कर्तव्य पथ, प्रस्तावित साझा केंद्रीय सचिवालय भवन, तथा सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत निर्मित अन्य केंद्रीय प्रशासनिक भवन शामिल होंगे। इसका उद्देश्य पूरे प्रशासनिक क्षेत्र को एकीकृत एवं सुव्यवस्थित पहचान प्रदान करना है।
नाम परिवर्तन का महत्व
सरकार के अनुसार यह परिवर्तन औपनिवेशिक विरासत से भारतीय दृष्टिकोण की ओर संक्रमण का प्रतीक है। "कर्तव्य" शब्द नागरिकों के प्रति शासन की जवाबदेही, सार्वजनिक सेवा, उत्तरदायित्व एवं संवैधानिक कर्तव्यों की भावना को अभिव्यक्त करता है। इससे पहले वर्ष 2022 में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया था तथा नए प्रधानमंत्री कार्यालय एवं संबंधित प्रशासनिक परिसर को "सेवा तीर्थ" नाम दिया गया।
सेंट्रल विस्टा परियोजना का व्यापक महत्व
यह परियोजना प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, सरकारी कार्यालयों के बिखराव को कम करने तथा आधुनिक, सुरक्षित एवं ऊर्जा-कुशल कार्यालय अवसंरचना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह नई दिल्ली के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र के दीर्घकालिक शहरी नियोजन (Urban Planning) का भी प्रमुख हिस्सा है।
UPSC दृष्टिकोण से महत्व
यह विषय शासन एवं प्रशासन, शहरी विकास, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, प्रशासनिक सुधार, सार्वजनिक अवसंरचना, औपनिवेशिक विरासत से जुड़े प्रतीकों का पुनर्नामकरण तथा संवैधानिक मूल्यों से संबंधित है। प्रारंभिक परीक्षा में कर्तव्य पथ, कर्तव्य भवन क्षेत्र, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना तथा उससे जुड़े तथ्यों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper II एवं GS Paper III) में सुशासन (Good Governance), प्रशासनिक आधुनिकीकरण, शहरी नियोजन, सार्वजनिक अवसंरचना विकास तथा राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतीकात्मक एवं कार्यात्मक पुनर्गठन के संदर्भ में इसका विश्लेषणात्मक महत्व है।