भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन – हरित परिवहन एवं स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ऐतिहासिक पहल
भारतीय रेलवे हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू करने जा रहा है, जो PEM फ्यूल सेल तकनीक से बिजली उत्पन्न करती है और केवल जलवाष्प उत्सर्जित करती है। यह 10 डिब्बों वाली ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी तथा स्वच्छ, लगभग शून्य-उत्सर्जन और ऊर्जा-कुशल परिवहन का नया उदाहरण प्रस्तुत करेगी। हरियाणा के जिंद में स्थापित भारत की पहली एकीकृत हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण एवं रिफ्यूलिंग सुविधा इस परियोजना को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों से जोड़ती है। ट्रेन में बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली अपनाई गई है तथा इसे NFPA-2, ISO 19880, PESO और TÜV SÜD (Germany) के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।
भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू करने जा रहा है। यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित की गई है तथा इसका प्रारंभिक संचालन हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर प्रस्तावित है। ट्रेन में प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प (Water Vapour) होता है, जिससे यह लगभग शून्य-उत्सर्जन (Near Zero Emission) वाली पर्यावरण-अनुकूल रेल तकनीक बन जाती है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक कैसे कार्य करती है?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल में संग्रहित हाइड्रोजन (H₂) वायु से प्राप्त ऑक्सीजन (O₂) के साथ PEM Fuel Cell में अभिक्रिया करती है। इस विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न बिजली ट्रैक्शन मोटरों को संचालित करती है, जबकि उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है। इसमें जीवाश्म ईंधन का दहन नहीं होता, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड अथवा अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन नगण्य रहता है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ
यह ट्रेन 10 डिब्बों (2 हाइड्रोजन पावर कार एवं 8 ट्रेलर कोच) से युक्त होगी और लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। प्रत्येक पावर कार की क्षमता 1,200 किलोवाट तथा कुल शक्ति 2,400 किलोवाट होगी। इसकी परिचालन गति लगभग 75 किमी/घंटा तथा अधिकतम डिज़ाइन गति 110 किमी/घंटा है। आकार और क्षमता के आधार पर यह विश्व की प्रमुख हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में से एक मानी जा रही है।
जिंद हाइड्रोजन इकोसिस्टम एवं राष्ट्रीय महत्व
हरियाणा के जिंद में भारत की पहली एकीकृत हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण एवं रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है। यहाँ जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा हाइड्रोजन का उत्पादन, उसका संपीड़न, सुरक्षित भंडारण तथा ट्रेनों में ईंधन भरने की व्यवस्था विकसित की गई है। यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission), स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण तथा भारत के नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्यों के अनुरूप है।
सुरक्षा एवं वैश्विक मानक
हाइड्रोजन की ज्वलनशील प्रकृति को देखते हुए ट्रेन में बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली (Multi-layered Safety System) अपनाई गई है। इसमें हाइड्रोजन रिसाव सेंसर, ज्वाला एवं धुआँ डिटेक्टर, तापमान निगरानी प्रणाली, स्वचालित शटडाउन, अग्निशमन प्रणाली तथा निरंतर वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं। परियोजना को NFPA-2, ISO 19880 श्रृंखला, PESO के मानकों तथा TÜV SÜD (Germany) द्वारा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के अनुरूप विकसित किया गया है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, पर्यावरण एवं अवसंरचना) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में Hydrogen Fuel Cell, PEM Technology, Electrolysis, Green Hydrogen, National Green Hydrogen Mission, PESO, NFPA-2, ISO 19880 तथा भारतीय रेलवे की हरित पहल से संबंधित तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में हरित परिवहन, ऊर्जा संक्रमण, डीकार्बोनाइजेशन, सतत अवसंरचना, स्वच्छ प्रौद्योगिकी एवं भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न आने की संभावना है।