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मिनी नंदी किसान समृद्धि योजना: स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक डेयरी विकास को बढ़ावा

Published 24 July 2026

मिनी नंदी किसान समृद्धि योजना का उद्देश्य स्वदेशी उच्च दुग्ध उत्पादन वाली गायों के माध्यम से वैज्ञानिक डेयरी प्रणाली को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। योजना के तहत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई के लिए परियोजना लागत का 50% (अधिकतम ₹11.80 लाख) तक अनुदान DBT के माध्यम से प्रदान किया जाता है। इसमें गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के साथ महिलाओं की कम-से-कम 50% भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह योजना दुग्ध उत्पादन, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, पशुधन विकास और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मिनी नंदी किसान समृद्धि योजना का उद्देश्य स्वदेशी उच्च दुग्ध उत्पादन वाली गायों के माध्यम से वैज्ञानिक डेयरी प्रणाली को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। यह योजना गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ स्वरोजगार आधारित डेयरी उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है।

वित्तीय सहायता एवं परियोजना मॉडल

योजना के अंतर्गत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए परियोजना लागत का 50% (अधिकतम ₹11.80 लाख) तक अनुदान प्रदान किया जाता है। शेष राशि लाभार्थी के अंशदान एवं बैंक ऋण से पूरी की जाती है। अनुदान की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से दो चरणों में जारी की जाती है, जिससे पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित होता है।

पात्रता एवं प्रमुख प्रावधान

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को भारतीय नागरिक होने के साथ कम-से-कम तीन वर्ष का डेयरी/पशुपालन अनुभव, डेयरी स्थापना हेतु पर्याप्त भूमि तथा पशुओं के चारे की उपलब्धता का प्रमाण देना आवश्यक है। लाभार्थियों में कम-से-कम 50% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है।

स्वदेशी नस्ल संरक्षण एवं पशुधन विकास

योजना के अंतर्गत केवल गिर, साहीवाल एवं थारपारकर जैसी उच्च उत्पादक स्वदेशी गायों को शामिल किया गया है। इससे पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा दुग्ध उत्पादकता में सुधार होगा। यह पहल राष्ट्रीय गोकुल मिशन और स्वदेशी पशुधन संरक्षण जैसे राष्ट्रीय प्रयासों के अनुरूप है।

आर्थिक एवं सामाजिक महत्व

यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, आय सृजन, महिला सशक्तिकरण, रोजगार एवं कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देती है। वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना तथा गुणवत्तापूर्ण पशुधन के माध्यम से यह किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

UPSC Prelims & Mains Facts

योजना का मुख्य फोकस स्वदेशी दुग्ध नस्लों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक डेयरी विकास पर है।

अधिकतम ₹11.80 लाख (50%) तक अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

योजना में महिला लाभार्थियों की न्यूनतम 50% भागीदारी का प्रावधान है।

यह विषय GS Paper III (Agriculture, Animal Husbandry, Rural Economy, Inclusive Growth) तथा ग्रामीण विकास एवं सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

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