आशीष डैश होंगे इंफोसिस के नए सीईओ एवं प्रबंध निदेशक: भारतीय आईटी उद्योग के नेतृत्व में नई शुरुआत
भारत की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस ने आशीष डैश को 1 अप्रैल 2027 से पाँच वर्ष के लिए नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त करने की घोषणा की है। वे सलिल पारेख का स्थान लेंगे और इंफोसिस के इतिहास में कंपनी के भीतर से नियुक्त होने वाले पहले सीईओ होंगे। वर्ष 1995 से इंफोसिस से जुड़े आशीष डैश को डिजिटल परिवर्तन, क्लाउड सेवाओं और वैश्विक व्यवसाय संचालन का लगभग तीन दशक का अनुभव है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक आईटी उद्योग एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और स्वचालन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत की अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनी इंफोसिस ने आशीष डैश को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त करने की घोषणा की है। वे 1 अप्रैल, 2027 से पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करेंगे। वे वर्तमान सीईओ सलिल पारेख का स्थान लेंगे, जिनका दूसरा कार्यकाल 31 मार्च, 2027 को समाप्त होगा। यह नियुक्ति कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश पर की गई।
नियुक्ति का महत्व
यह नियुक्ति भारतीय आईटी उद्योग के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि आशीष डैश इंफोसिस के इतिहास में कंपनी के भीतर से नियुक्त होने वाले पहले सीईओ होंगे। इससे पहले के प्रमुख सीईओ, जैसे विशाल सिक्का और सलिल पारेख, बाहरी कंपनियों से नियुक्त किए गए थे। यह निर्णय नेतृत्व विकास, उत्तराधिकार योजना (Succession Planning) और संस्थागत क्षमता निर्माण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आशीष डैश का प्रशासनिक एवं व्यावसायिक प्रोफ़ाइल
आशीष डैश ने 1995 में सीनियर एंगेजमेंट इंजीनियर के रूप में इंफोसिस में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से वर्ष 1994 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। लगभग तीन दशकों के कार्यकाल में उन्होंने ऊर्जा, उपयोगिताओं एवं संसाधन (Energy, Utilities and Resources) व्यवसाय का नेतृत्व किया तथा अमेरिका सहित विभिन्न वैश्विक बाजारों में रणनीतिक जिम्मेदारियाँ निभाईं। डिजिटल परिवर्तन, क्लाउड सेवाओं और वैश्विक ग्राहक प्रबंधन में उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है।
वर्तमान वैश्विक आईटी परिदृश्य
आशीष डैश ऐसे समय में नेतृत्व संभालेंगे जब वैश्विक आईटी उद्योग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI), जनरेटिव एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, स्वचालन (Automation) और डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। कंपनियों के लिए नवाचार, उत्पादकता बढ़ाना तथा ग्राहकों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाना प्रमुख चुनौती है। ऐसे में इंफोसिस का नया नेतृत्व भारत की आईटी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सलिल पारेख के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियाँ
सलिल पारेख ने वर्ष 2018 में इंफोसिस का नेतृत्व संभाला और लगभग नौ वर्षों के कार्यकाल में कंपनी को उल्लेखनीय वृद्धि दिलाई। उनके नेतृत्व में कंपनी का राजस्व ₹70,522 करोड़ से बढ़कर ₹1,78,650 करोड़, शुद्ध लाभ ₹16,029 करोड़ से बढ़कर ₹29,440 करोड़ तथा बाजार पूंजीकरण ₹2.47 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.07 लाख करोड़ से अधिक हो गया। उन्होंने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, वित्तीय अनुशासन, डिजिटल सेवाओं और क्लाउड आधारित समाधानों को भी सुदृढ़ किया।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह समाचार भारतीय आईटी उद्योग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, नेतृत्व परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार तथा भारत के सेवा क्षेत्र से संबंधित है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में प्रमुख कंपनियों के शीर्ष पदों पर नियुक्तियाँ तथा मुख्य परीक्षा के GS Paper-III (भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आईटी एवं नवाचार) के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को भारत के आईटी उद्योग की वैश्विक भूमिका, डिजिटल परिवर्तन, AI आधारित अर्थव्यवस्था तथा कॉर्पोरेट नेतृत्व के बदलते स्वरूप का समग्र अध्ययन अवश्य करना चाहिए।