कर्नाटक की ‘थायी भाग्य योजना’: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने की राज्य सरकार की पहल
कर्नाटक थायी भाग्य योजना कर्नाटक सरकार की मातृ स्वास्थ्य योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2009 में आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क एवं कैशलेस मातृत्व सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। योजना का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल को सुदृढ़ करना है। इसके तहत पात्र महिलाओं को सरकारी एवं पंजीकृत निजी अस्पतालों में निःशुल्क प्रसव, दवाएँ, स्वास्थ्य जाँच, परिवहन और कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण) के लक्ष्यों के अनुरूप सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देती है।
कर्नाटक थायी भाग्य योजना (Karnataka Thayi Bhagya Scheme) कर्नाटक सरकार की एक प्रमुख मातृ स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क एवं कैशलेस मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से की गई थी। "थायी" का अर्थ माँ तथा "भाग्य" का अर्थ भविष्य है, जो माताओं और नवजात शिशुओं के सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन की परिकल्पना को दर्शाता है।
योजना के उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देना, मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio - MMR) एवं शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR) में कमी लाना तथा गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही योजना गर्भावस्था के शीघ्र पंजीकरण, नियमित प्रसवपूर्व जाँच (Antenatal Care - ANC), सुरक्षित प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल (Postnatal Care - PNC) को भी प्रोत्साहित करती है।
योजना के प्रमुख लाभ एवं विशेषताएँ
योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को सरकारी एवं पंजीकृत निजी अस्पतालों में निःशुल्क प्रसव, कैशलेस उपचार, आवश्यक दवाएँ, स्वास्थ्य जाँच, प्रसव संबंधी परिवहन सुविधा तथा अस्पताल में भर्ती से लेकर छुट्टी तक की सभी चिकित्सा सेवाएँ बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें सामान्य प्रसव, सीज़ेरियन प्रसव, जटिल प्रसव तथा फोर्सेप डिलीवरी जैसी सभी प्रकार की प्रसूति सेवाएँ शामिल हैं, जिससे प्रत्येक महिला को सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सके।
पात्रता एवं कार्यान्वयन व्यवस्था
यह योजना कर्नाटक के स्थायी निवासियों के लिए लागू है तथा इसका लाभ मुख्यतः गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों, अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दिया जाता है। योजना का लाभ सामान्यतः पहले दो प्रसवों तक सीमित है। आवेदन प्रक्रिया में आशा (ASHA) कार्यकर्ता एवं महिला स्वास्थ्य सहायक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर ANC कार्ड जारी करते हैं।
स्वास्थ्य नीति एवं प्रशासनिक महत्व
यह योजना भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission - NHM) तथा सतत विकास लक्ष्य (SDG-3: Good Health and Well-being) के उद्देश्यों के अनुरूप मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार का प्रयास है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर यह योजना सुरक्षित मातृत्व, समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप, स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक पहुँच तथा सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के स्वास्थ्य संरक्षण को मजबूत करती है। राज्य सरकार द्वारा अस्पतालों को प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रदान करने की व्यवस्था कैशलेस स्वास्थ्य सेवा मॉडल को प्रभावी बनाती है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह योजना UPSC प्रारंभिक परीक्षा में राज्य सरकारों की प्रमुख योजनाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, MMR, IMR, ANC, PNC, संस्थागत प्रसव, तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्य परीक्षा (GS Paper-II) में स्वास्थ्य क्षेत्र की सरकारी नीतियाँ, सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ, समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के संदर्भ में यह विषय अत्यंत उपयोगी है। अभ्यर्थियों को मातृ स्वास्थ्य से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) तथा राज्यों की स्वास्थ्य योजनाओं का तुलनात्मक अध्ययन अवश्य करना चाहिए।