धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार: संवैधानिक प्रक्रिया एवं प्रशासनिक महत्व
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार कर प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। प्रल्हाद जोशी अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ अगले आदेश तक शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे। शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, अनुसंधान एवं डिजिटल शिक्षा जैसी प्रमुख नीतियों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। यह नियुक्ति मंत्रालय में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने और शिक्षा क्षेत्र की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
संवैधानिक आधार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75 केंद्रीय मंत्रिपरिषद की नियुक्ति, कार्यकाल एवं उत्तरदायित्व से संबंधित है। अनुच्छेद 75(2) के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the President) पद पर बने रहते हैं। व्यवहार में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर ही मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हैं तथा मंत्रालयों का पुनर्वितरण भी प्रधानमंत्री की अनुशंसा के आधार पर किया जाता है।
अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) का महत्व
किसी मंत्री के इस्तीफे, निधन या पद रिक्त होने की स्थिति में सरकार प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए किसी अन्य मंत्री को अतिरिक्त प्रभार देती है। इससे मंत्रालय का कार्य बाधित नहीं होता और नई नियुक्ति होने तक नीतिगत तथा प्रशासनिक निर्णय नियमित रूप से जारी रहते हैं।
प्रल्हाद जोशी का प्रशासनिक एवं राजनीतिक प्रोफ़ाइल
प्रल्हाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से कई बार लोकसभा सांसद चुने गए वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले वे संसदीय कार्य, कोयला तथा खान मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का भी दायित्व संभाल चुके हैं।
शिक्षा मंत्रालय का महत्व
शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), उच्च शिक्षा सुधार, विद्यालयी शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों और विभिन्न शिक्षा नियामक संस्थाओं से संबंधित नीतियों का संचालन करता है। अतः मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन शिक्षा क्षेत्र की नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से प्रमुख तथ्य (Key Takeaways)
अनुच्छेद 75(2): मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हैं।
मंत्रालयों का आवंटन एवं अतिरिक्त प्रभार प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर किया जाता है।
अतिरिक्त प्रभार प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने की व्यवस्था है।
शिक्षा मंत्रालय NEP 2020, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं अनुसंधान से संबंधित प्रमुख नीतियों का संचालन करता है।
मंत्रिपरिषद में फेरबदल (Cabinet Reshuffle) भारतीय संसदीय शासन प्रणाली का नियमित प्रशासनिक एवं राजनीतिक उपकरण है।