माझी कन्या भाग्यश्री योजना: बालिका सशक्तिकरण, लिंगानुपात सुधार एवं वित्तीय सुरक्षा की महाराष्ट्र सरकार की पहल
माझी कन्या भाग्यश्री योजना महाराष्ट्र सरकार की बालिका कल्याण एवं वित्तीय सुरक्षा योजना है, जिसे 1 अगस्त 2017 से बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहन, लिंगानुपात सुधार और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया। इस योजना के तहत एक बेटी वाले परिवार को ₹50,000 तथा दो बेटियों वाले परिवार को प्रत्येक बेटी के लिए ₹25,000 की सावधि जमा दी जाती है, जो 18 वर्ष की आयु पर परिपक्व होती है। लाभार्थियों को प्रत्येक छह वर्ष में ब्याज निकालने, ₹5,000 तक की ऋण सुविधा और ₹1 लाख का आकस्मिक बीमा भी उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ महाराष्ट्र के पात्र स्थायी निवासियों को निर्धारित आय सीमा, परिवार नियोजन प्रमाण-पत्र तथा अन्य पात्रता शर्तों के आधार पर प्रदान किया जाता है।
माझी कन्या भाग्यश्री योजना महाराष्ट्र सरकार की एक प्रमुख बालिका कल्याण एवं वित्तीय सुरक्षा योजना है, जिसे 1 अगस्त 2017 से राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लागू किया गया। योजना का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करना, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, लिंगानुपात में सुधार करना तथा बालिकाओं की शिक्षा एवं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह योजना परिवार नियोजन को भी प्रोत्साहित करती है।
प्रमुख विशेषताएँ एवं वित्तीय सहायता
योजना के अंतर्गत एक बेटी वाले पात्र परिवार को ₹50,000 की सावधि जमा (Fixed Deposit) तथा दो बेटियों वाले परिवार को प्रत्येक बेटी के लिए ₹25,000 की सावधि जमा प्रदान की जाती है। यह राशि बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर परिपक्व होती है। जमा पर अर्जित ब्याज प्रत्येक छह वर्ष के अंतराल पर निकाला जा सकता है। इसके अतिरिक्त, योजना के अंतर्गत ₹5,000 तक की ऋण सुविधा तथा ₹1 लाख का आकस्मिक बीमा भी उपलब्ध कराया गया है।
पात्रता एवं लाभार्थी
इस योजना का लाभ केवल महाराष्ट्र के स्थायी निवासियों को मिलता है, जिनकी पुत्री का जन्म 1 अगस्त 2017 या उसके बाद हुआ हो। परिवार की वार्षिक आय ₹7.5 लाख से कम होनी चाहिए तथा परिवार नियोजन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। योजना का लाभ केवल एक या दो बेटियों वाले परिवारों को दिया जाता है तथा बालिका का 18 वर्ष से पूर्व विवाह होने या शिक्षा बीच में छोड़ने की स्थिति में लाभ समाप्त हो सकता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में यह योजना महिला एवं बाल विकास, राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ, लैंगिक समानता (Gender Equality), जनसंख्या नीति एवं परिवार नियोजन से संबंधित प्रश्नों में पूछी जा सकती है। मुख्य परीक्षा (GS Paper-II) में इसे महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, बाल अधिकार, मानव विकास एवं समावेशी विकास (Inclusive Development) के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जा सकता है।