पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के पवित्र नामों को ट्रेडमार्क संरक्षण: सांस्कृतिक विरासत एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
ओडिशा के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने पुरी जगन्नाथ मंदिर से जुड़े पवित्र नामों एवं प्रतीकों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ट्रेडमार्क संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। हाल ही में जगन्नाथ धाम, श्री क्षेत्र, महाप्रसाद, नीलाचक्र और कोइली वैकुंठ सहित पाँच प्रमुख ट्रेडमार्क आवेदनों को स्वीकृति मिली है। इस पहल का उद्देश्य इन पवित्र नामों के व्यावसायिक दुरुपयोग और भ्रामक उपयोग को रोकना है, विशेषकर दीघा मंदिर के "जगन्नाथ धाम" नाम विवाद के बाद। भारत में यह संरक्षण ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 एवं ट्रेड मार्क्स नियम, 2017 के तहत प्रदान किया जाता है, जिससे संबंधित संस्था को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है।
ओडिशा के 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र नामों एवं प्रतीकों के लिए ट्रेडमार्क संरक्षण (Trademark Protection) प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। हाल ही में ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री ने पाँच प्रमुख ट्रेडमार्क आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की है। यह पहल विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित मंदिर द्वारा "जगन्नाथ धाम" नाम के उपयोग को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद की गई, ताकि पुरी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को कानूनी संरक्षण मिल सके।
ट्रेडमार्क संरक्षण का उद्देश्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुरी जगन्नाथ मंदिर से जुड़े पवित्र नामों, प्रतीकों और धार्मिक परंपराओं के व्यावसायिक दुरुपयोग (Commercial Misuse) तथा भ्रामक उपयोग को रोकना है। SJTA ने कुल 29 नामों एवं प्रतीकों के लिए ट्रेडमार्क आवेदन प्रस्तुत किए हैं। यह धार्मिक आस्था को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान की रक्षा करने के लिए किया गया है।
स्वीकृत प्रमुख ट्रेडमार्क एवं उनका महत्व
अब तक जिन पाँच नामों को स्वीकृति मिली है, वे हैं— जगन्नाथ धाम, श्री क्षेत्र, महाप्रसाद, नीलाचक्र और कोइली वैकुंठ। ये सभी नाम भगवान जगन्नाथ की परंपरा, पुरी मंदिर की धार्मिक व्यवस्था तथा ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से "जगन्नाथ धाम" हिंदू धर्म के चार धामों में से एक पुरी की पहचान का प्रतीक है, जबकि महाप्रसाद और नीलाचक्र मंदिर की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कानूनी एवं प्रशासनिक पक्ष
भारत में ट्रेडमार्क संरक्षण ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 तथा ट्रेड मार्क्स नियम, 2017 के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। ट्रेडमार्क रजिस्ट्री द्वारा परीक्षण एवं प्रकाशन के बाद यदि निर्धारित अवधि में कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो संबंधित नामों का अंतिम पंजीकरण किया जाता है। इससे संबंधित संस्था को उन नामों एवं प्रतीकों के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त होता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में ट्रेडमार्क, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), चार धाम, जगन्नाथ मंदिर, भारतीय सांस्कृतिक विरासत तथा GI Tag और Trademark के अंतर से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper-II एवं GS Paper-I) में इसे सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, धार्मिक स्थलों का प्रबंधन, बौद्धिक संपदा अधिकार, सांस्कृतिक कूटनीति तथा संविधान के अनुच्छेद 49 एवं 51A(f) के संदर्भ में उद्धृत किया जा सकता है।