उच्चस्तरीय परीक्षा सुरक्षा कार्य बल: भारत की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी एवं विश्वसनीयता की नई पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए उच्चस्तरीय परीक्षा सुरक्षा कार्य बल के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता नंदन नीलेकानी करेंगे तथा इसमें शिक्षा, प्रौद्योगिकी, विज्ञान, प्रशासन और सुरक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। कार्य बल पेपर लीक, प्रतिरूपण और साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए AI आधारित निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्नपत्र और मजबूत साइबर सुरक्षा जैसे तकनीकी सुधारों की सिफारिश करेगा। यह पहल डिजिटल गवर्नेंस, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा UPSC, SSC, NEET, JEE सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय परीक्षा सुरक्षा कार्य बल (Examination Security Task Force) के गठन की घोषणा की है। हाल के वर्षों में पेपर लीक, प्रतिरूपण (Impersonation), साइबर धोखाधड़ी तथा अनुचित साधनों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह पहल की गई है। कार्य बल परीक्षा प्रणाली में तकनीकी एवं संस्थागत सुधारों की सिफारिश करेगा, जिससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को सुदृढ़ किया जा सके।
कार्य बल की संरचना एवं प्रमुख सदस्य
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकानी करेंगे, जिन्हें डिजिटल गवर्नेंस एवं आधार (UIDAI) परियोजना के सफल क्रियान्वयन का व्यापक अनुभव है। समिति में अमृत लाल मीना (प्रशासन), अनीता कारवाल (शिक्षा), डॉ. वी. कामाकोटी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी), एस. सोमनाथ (विज्ञान एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) तथा तपन डेका (आंतरिक सुरक्षा एवं खुफिया) जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं। यह बहु-विषयक संरचना परीक्षा सुरक्षा के विभिन्न आयामों को समग्र रूप से संबोधित करने में सहायक होगी।
प्रमुख उद्देश्य एवं प्रस्तावित सुधार
कार्य बल का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और प्रतिरूपण जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्नपत्र वितरण, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, साइबर सुरक्षा तंत्र तथा सुरक्षित लॉजिस्टिक्स प्रणाली जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों की सिफारिश की जाएगी। इन सुधारों से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा दक्षता बढ़ने की अपेक्षा है।
शासन एवं शिक्षा प्रणाली में महत्त्व
यह पहल भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) तथा ई-गवर्नेंस को शिक्षा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे UPSC, SSC, RRB, NEET, JEE, CUET, बैंकिंग तथा राज्य लोक सेवा आयोगों जैसी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के गुणवत्तापूर्ण एवं जवाबदेह शिक्षा तंत्र के उद्देश्य को भी सशक्त करती है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में इस समाचार से डिजिटल गवर्नेंस, आधार (UIDAI), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, परीक्षा सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) तथा प्रमुख व्यक्तियों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper-II) में इसे सुशासन (Good Governance), संस्थागत सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटल प्रशासन एवं सार्वजनिक सेवा सुधार के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जा सकता है। GS Paper-III में इसका संबंध साइबर सुरक्षा एवं उभरती प्रौद्योगिकियों से भी जोड़ा जा सकता है।