विश्व रेंजर दिवस: जैव विविधता संरक्षण के अग्रदूत वन रक्षकों को समर्पित वैश्विक दिवस
विश्व रेंजर दिवस प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को वन रेंजरों के योगदान का सम्मान करने तथा ड्यूटी के दौरान शहीद या घायल हुए रेंजरों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2007 में International Ranger Federation (IRF) ने The Thin Green Line Foundation के सहयोग से की थी। वन रेंजर जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, अवैध शिकार की रोकथाम, वन अपराध नियंत्रण और संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत जैसे मेगा जैव विविधता वाले देश में प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट तथा अन्य संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता में वन रेंजरों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्व रेंजर दिवस (World Ranger Day) प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर के वन रेंजरों (Park Rangers/Forest Rangers) द्वारा जैव विविधता, वन्यजीवों और संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा में दिए गए योगदान का सम्मान करना तथा ड्यूटी के दौरान शहीद या घायल हुए रेंजरों को श्रद्धांजलि देना है।
शुरुआत एवं आयोजन
विश्व रेंजर दिवस की शुरुआत वर्ष 2007 में International Ranger Federation (IRF) द्वारा, इसकी स्थापना की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर की गई थी। इस दिवस को The Thin Green Line Foundation के सहयोग से मनाया जाता है, जो विश्वभर में रेंजरों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए कार्य करती है।
वन रेंजरों की भूमिका
वन रेंजर संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और बायोस्फीयर रिजर्व की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके प्रमुख कार्यों में अवैध शिकार (Poaching) की रोकथाम, वन्यजीव संरक्षण, वन अपराध नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रबंधन, वनाग्नि नियंत्रण तथा पर्यावरण जागरूकता शामिल हैं।
भारत के लिए महत्व
भारत विश्व के मेगा जैव विविधता (Mega Biodiversity) वाले देशों में से एक है। राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व, हाथी रिजर्व तथा अन्य संरक्षित क्षेत्रों की प्रभावी सुरक्षा में वन रेंजरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट तथा अन्य संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता काफी हद तक इनके समर्पण पर निर्भर करती है।
UPSC Perspective: पर्यावरण एवं शासन
विश्व रेंजर दिवस जैव विविधता संरक्षण, सतत विकास, वन शासन (Forest Governance), जलवायु परिवर्तन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा वन्यजीव संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। यह पर्यावरण संरक्षण में मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता निर्माण के महत्व को भी रेखांकित करता है।