भारत को डेंगू का पहला टीका ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA) मंजूर: डेंगू नियंत्रण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने डेंगू के पहले टीके 'क्यूडेंगा (QDENGA)' के उपयोग को मंजूरी दी है, जिसे जापान की टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स ने विकसित किया है। यह 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए स्वीकृत जीवित क्षीण (Live Attenuated) टीका है, जो डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप से सुरक्षा प्रदान करता है और इसके लिए पूर्व स्क्रीनिंग की आवश्यकता नहीं होती। डेंगू के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध न होने के कारण यह टीका भारत में डेंगू नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। WHO से पूर्व-योग्यता प्राप्त यह टीका 43 देशों में स्वीकृत है तथा क्लिनिकल परीक्षणों में डेंगू संक्रमण के विरुद्ध लगभग 80% और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 90% से अधिक तक कम करने में प्रभावी पाया गया है।
भारत के औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of India – DCGI) ने डेंगू के पहले टीके ‘क्यूडेंगा (QDENGA)’ के उपयोग को मंजूरी प्रदान की है। यह टीका जापान की टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स (Takeda Biopharmaceuticals) द्वारा विकसित किया गया है। यह भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए उपलब्ध पहला स्वीकृत टीका है तथा 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को लगाया जा सकता है।
क्यूडेंगा (QDENGA) की प्रमुख विशेषताएँ
क्यूडेंगा एक जीवित क्षीण (Live Attenuated) टीका है, जो डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है। इस टीके की दो खुराकें निर्धारित अंतराल पर दी जाती हैं। इसकी विशेषता यह है कि टीकाकरण से पहले डेंगू संक्रमण की स्क्रीनिंग (Serological Screening) आवश्यक नहीं है, जिससे व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाना अधिक सरल हो जाता है।
डेंगू नियंत्रण में महत्त्व
भारत में डेंगू एडीज (Aedes aegypti) मच्छर द्वारा फैलने वाला प्रमुख वायरल रोग है और इसके मामलों में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डेंगू के लिए अभी तक कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है, इसलिए टीकाकरण, मच्छर नियंत्रण, रोग निगरानी तथा जन-जागरूकता मिलकर इसकी रोकथाम की मुख्य रणनीति बनाते हैं। क्यूडेंगा की मंजूरी डेंगू नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रभावकारिता एवं वैश्विक स्थिति
क्यूडेंगा की प्रभावशीलता वैश्विक TIDES Phase-III क्लिनिकल परीक्षण सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सिद्ध हुई है। परीक्षणों में यह प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए डेंगू संक्रमण के विरुद्ध लगभग 80% प्रभावी तथा अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 90% से अधिक तक कम करने में सक्षम पाया गया। इस टीके को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व-योग्यता (WHO Prequalification) प्राप्त है तथा इसे 43 देशों में उपयोग की स्वीकृति मिल चुकी है।
UPSC के लिए महत्त्व
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में डेंगू, एडीज मच्छर, डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप, DCGI, WHO Prequalification, Live Attenuated Vaccine तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper-III) में टीका विकास, जैव-प्रौद्योगिकी, संक्रामक रोग नियंत्रण, महामारी प्रबंधन एवं भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के संदर्भ में यह विषय महत्वपूर्ण है।