पेटीएम पेमेंट्स बैंक का परिसमापन: RBI की नियामक कार्रवाई, बैंकिंग अनुपालन और जमाकर्ताओं की सुरक्षा पर बड़ा कदम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दिल्ली उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद नियामकीय उल्लंघनों के कारण पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक का समापन बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत किया जाएगा तथा गिरिकुमार नायर को आधिकारिक परिसमापक नियुक्त किया गया है। RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक के पास जमाकर्ताओं की देनदारियों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त तरलता उपलब्ध है, इसलिए पात्र ग्राहकों को नियमानुसार उनकी राशि वापस मिलेगी। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दिल्ली उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) के परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक का समापन बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 तथा कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए SBI के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरिकुमार नायर को आधिकारिक परिसमापक नियुक्त किया गया है।
RBI ने यह कार्रवाई क्यों की?
RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के विरुद्ध गंभीर नियामकीय (Regulatory) उल्लंघनों, अनुपालन संबंधी कमियों तथा बैंक के संचालन में पाई गई अनियमितताओं के कारण उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता तथा नियामकीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पेमेंट्स बैंक क्या है?
पेमेंट्स बैंक RBI द्वारा वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए स्थापित विशेष श्रेणी के बैंक हैं। ये सीमित राशि तक जमा स्वीकार कर सकते हैं, बचत एवं चालू खाते संचालित करते हैं, डिजिटल भुगतान और धन प्रेषण सेवाएँ प्रदान करते हैं तथा डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं। हालांकि, इन्हें ऋण (Loan) देने या क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति नहीं होती।
जमाकर्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
RBI ने स्पष्ट किया है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पास अपनी जमा देनदारियों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त तरलता (Liquidity) उपलब्ध है। इसलिए पात्र जमाकर्ताओं को कानूनी एवं नियामकीय प्रक्रिया के अनुसार उनकी राशि वापस मिलने की व्यवस्था की जाएगी। यह कदम वित्तीय प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
UPSC Perspective: संस्थागत एवं आर्थिक महत्व
यह घटना भारत में केंद्रीय बैंक की नियामक भूमिका, बैंकिंग शासन (Banking Governance), कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व तथा वित्तीय क्षेत्र में अनुपालन (Compliance) के महत्व को दर्शाती है। साथ ही यह बताती है कि डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक संस्थानों के लिए भी समान नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य है।