RBI का वित्तीय समावेशन (FI) सूचकांक 70 पर पहुँचा – भारत में औपचारिक वित्तीय सेवाओं की बढ़ती पहुँच और उपयोग का संकेत
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार मार्च 2026 में भारत का वित्तीय समावेशन (FI) सूचकांक बढ़कर 70 हो गया, जो मार्च 2025 में 67 था, जिससे औपचारिक वित्तीय सेवाओं की बढ़ती पहुँच और उपयोग का संकेत मिलता है। RBI द्वारा वर्ष 2021 में शुरू किया गया यह समग्र सूचकांक बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन, निवेश तथा डाक वित्तीय सेवाओं में वित्तीय समावेशन का आकलन 0 से 100 के पैमाने पर करता है। FI सूचकांक तीन प्रमुख आयामों—पहुँच (35%), उपयोग (45%) और गुणवत्ता (20%)—पर आधारित है, जिसमें वर्ष 2026 की वृद्धि का मुख्य कारण वित्तीय सेवाओं के उपयोग में बढ़ोतरी रही। जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति, UPI, DBT, बैंकिंग संवाददाता मॉडल और वित्तीय साक्षरता अभियानों ने वित्तीय समावेशन को मजबूत किया है, जिससे समावेशी विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिला है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत का वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion - FI) सूचकांक बढ़कर 70 हो गया है, जो मार्च 2025 में 67 था। यह वृद्धि दर्शाती है कि देश में बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन तथा निवेश जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक नागरिकों की पहुँच और उनका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
वित्तीय समावेशन (FI) सूचकांक क्या है?
वित्तीय समावेशन सूचकांक RBI द्वारा वर्ष 2021 में विकसित किया गया एक समग्र (Composite) सूचकांक है, जिसका उद्देश्य देश में वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, उपयोग और गुणवत्ता का आकलन करना है। यह बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन, निवेश तथा डाक वित्तीय सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन की प्रगति को मापता है। इसका स्कोर 0 से 100 के बीच होता है, जहाँ 0 का अर्थ पूर्ण वित्तीय बहिष्करण तथा 100 का अर्थ पूर्ण वित्तीय समावेशन है।
FI सूचकांक के प्रमुख घटक
RBI वित्तीय समावेशन सूचकांक का निर्धारण तीन प्रमुख आयामों के आधार पर करता है—
पहुँच (Access) – 35%: बैंक शाखाएँ, एटीएम, बैंकिंग संवाददाता (BC) तथा वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता।
उपयोग (Usage) – 45%: बैंक खातों का सक्रिय उपयोग, डिजिटल भुगतान, बचत, ऋण, बीमा और पेंशन सेवाओं का उपयोग। वित्त वर्ष 2026 में सूचकांक में वृद्धि का प्रमुख कारण यही घटक रहा।
गुणवत्ता (Quality) – 20%: वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता, उपभोक्ता संरक्षण, वित्तीय साक्षरता तथा सेवा वितरण की दक्षता।
FI सूचकांक में वृद्धि के प्रमुख कारण
भारत में जनधन खाते, आधार और मोबाइल (JAM Trinity), डिजिटल भुगतान अवसंरचना (विशेषकर UPI), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), बैंकिंग संवाददाता मॉडल, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा वित्तीय साक्षरता अभियानों ने वित्तीय समावेशन को मजबूत किया है। इससे नागरिकों द्वारा औपचारिक वित्तीय उत्पादों और सेवाओं का उपयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
वित्तीय समावेशन समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास का आधार माना जाता है। इससे बचत की प्रवृत्ति बढ़ती है, ऋण एवं बीमा तक पहुँच आसान होती है, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है, सरकारी सब्सिडी एवं लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचते हैं तथा अनौपचारिक वित्तीय स्रोतों पर निर्भरता कम होती है। यह गरीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास एवं वित्तीय क्षेत्र) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में FI Index, JAM Trinity, PM Jan Dhan Yojana, UPI, DBT, Banking Correspondent Model, Financial Literacy तथा RBI से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में वित्तीय समावेशन, डिजिटल वित्त, समावेशी विकास तथा आर्थिक सशक्तिकरण पर विश्लेषणात्मक प्रश्न आने की संभावना रहती है।