RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) जून 2026: भारतीय बैंकिंग प्रणाली की मजबूती एवं उभरते जोखिम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जून 2026 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) जारी की, जिसमें भारतीय बैंकिंग प्रणाली को मजबूत और स्थिर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की ऋण वृद्धि 14.5%, सकल एनपीए 1.8% (दशकों का सबसे निचला स्तर) तथा कर पश्चात लाभ ₹4.05 लाख करोड़ रहा। साथ ही बैंकों के LCR (124.2%) और NSFR (122.1%) नियामकीय मानकों से अधिक दर्ज किए गए। रिपोर्ट में साइबर सुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक मंदी और असुरक्षित ऋणों में वृद्धि को भविष्य के प्रमुख जोखिम बताया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report – FSR), जून 2026 जारी की है। यह अर्धवार्षिक (Half-Yearly) रिपोर्ट भारत की वित्तीय प्रणाली की स्थिति, बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs), बीमा, म्यूचुअल फंड तथा वित्तीय बाज़ारों का समग्र मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। साथ ही यह भविष्य में उत्पन्न होने वाले संभावित जोखिमों और नीतिगत चुनौतियों का भी विश्लेषण करती है।
वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) का महत्व
FSR भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रमुख विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है, जिसे वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) की उप-समिति के सहयोग से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में संभावित प्रणालीगत जोखिमों (Systemic Risks) की पहचान करना, वित्तीय संस्थानों की मजबूती का आकलन करना तथा नीति-निर्माताओं को समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने हेतु आधार प्रदान करना है।
जून 2026 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय बैंकिंग प्रणाली मजबूत स्थिति में है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) की ऋण वृद्धि 14.5% रही, सकल एनपीए (GNPA) अनुपात 1.8% पर आ गया, जो कई दशकों का सबसे निचला स्तर है। बैंकों का कर पश्चात लाभ ₹4.05 लाख करोड़ रहा तथा तरलता कवरेज अनुपात (LCR) 124.2% और शुद्ध स्थिर वित्तपोषण अनुपात (NSFR) 122.1% दर्ज किया गया, जो नियामकीय आवश्यकताओं से अधिक है।
प्रमुख चुनौतियाँ एवं जोखिम
रिपोर्ट में बैंकिंग प्रणाली के समक्ष कई उभरते जोखिमों की पहचान की गई है। इनमें साइबर सुरक्षा खतरे, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक मंदी, अस्थिर पूंजी प्रवाह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े निवेश जोखिम, असुरक्षित ऋणों में वृद्धि तथा कुछ क्षेत्रों में ऋण का अत्यधिक संकेंद्रण प्रमुख हैं। RBI ने वित्तीय संस्थानों को इन जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।
UPSC के लिए महत्व
यह रिपोर्ट UPSC प्रारंभिक परीक्षा में RBI, FSDC, GNPA, LCR, NSFR, बैंकिंग सुधार, वित्तीय स्थिरता एवं नियामक संस्थाओं से जुड़े प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्य परीक्षा (GS-III) में इसे भारतीय अर्थव्यवस्था, वित्तीय क्षेत्र सुधार, बैंकिंग प्रणाली, साइबर सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, आर्थिक स्थिरता तथा वैश्विक आर्थिक जोखिमों के संदर्भ में जोड़ा जा सकता है।