भारत–यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC): रणनीतिक साझेदारी को नई गति
ब्रुसेल्स में आयोजित भारत–यूरोपीय संघ (EU) व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की तीसरी बैठक में AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। Trade and Technology Council (TTC) भारत और EU के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश तथा डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने वाला उच्च-स्तरीय रणनीतिक मंच है। बैठक में उन्नत प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, बैटरी तकनीक, ऊर्जा दक्षता और सतत गतिशीलता जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया। यह सहयोग भारत की तकनीकी क्षमता, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगा।
ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में आयोजित भारत–यूरोपीय संघ (EU) व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Trade and Technology Council - TTC) की तीसरी बैठक में दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया।
भारत–EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) क्या है?
Trade and Technology Council (TTC) भारत और यूरोपीय संघ के बीच स्थापित एक उच्च-स्तरीय रणनीतिक मंच है, जिसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को मजबूत करना है। यह परिषद उभरती प्रौद्योगिकियों, वैश्विक व्यापार चुनौतियों तथा आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर दोनों पक्षों के बीच नीति-समन्वय का प्रमुख मंच है।
बैठक के प्रमुख चर्चा क्षेत्र
तीसरी TTC बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता तथा सतत गतिशीलता (Sustainable Mobility) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहित करने तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने पर भी चर्चा हुई।
भारत के लिए इसका महत्त्व
भारत–EU सहयोग से उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुंच, निवेश में वृद्धि, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत होगी। यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया, हरित विकास (Green Growth) तथा उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को भी सुदृढ़ करेगी।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय GS Paper-2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध) तथा GS Paper-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा एवं औद्योगिक विकास) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। परीक्षा में भारत–EU संबंध, TTC, मुक्त व्यापार समझौता (FTA), आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, AI, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन एवं डिजिटल सहयोग से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे वैश्विक भू-राजनीति एवं तकनीकी कूटनीति के संदर्भ में भी जोड़ा जा सकता है।