भारत–मालदीव डिजिटल भुगतान सहयोग: फवारा–UPI सीमा-पार भुगतान कॉरिडोर का शुभारंभ
30 जुलाई 2026 को मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (MMA) ने फवारा–UPI सीमा-पार भुगतान कॉरिडोर शुरू किया, जिससे मालदीव के नागरिक अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप के माध्यम से भारत के UPI खातों में रियल-टाइम धन हस्तांतरित कर सकेंगे। यह प्रणाली मालदीव की Favara और भारत की UPI भुगतान प्रणाली का तकनीकी एकीकरण है, जिसमें MVR से भुगतान कर प्राप्तकर्ता को INR में राशि मिलती है। इस परियोजना में MMA, RBI, NPCI International Payments Limited (NIPL) तथा दोनों देशों के बैंकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पहल भारत–मालदीव के बीच डिजिटल भुगतान, वित्तीय सहयोग और फिनटेक एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
30 जुलाई 2026 को मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (Maldives Monetary Authority - MMA) ने फवारा (Favara)–UPI सीमा-पार भुगतान कॉरिडोर की शुरुआत की। इस व्यवस्था के माध्यम से मालदीव के नागरिक अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप का उपयोग कर भारत के UPI-सक्षम बैंक खातों में वास्तविक समय (Real-time) में धन भेज सकेंगे। यह पहल भारत और मालदीव के बीच डिजिटल वित्तीय सहयोग तथा सीमा-पार भुगतान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
फवारा–UPI भुगतान कॉरिडोर क्या है?
यह मालदीव की इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम ‘फवारा (Favara)’ और भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का तकनीकी एकीकरण है। इस प्रणाली के माध्यम से मालदीव के उपयोगकर्ता अपने बैंक खाते से सीधे भारत में धन हस्तांतरित कर सकते हैं। लेनदेन मालदीवियन रुफिया (MVR) में प्रारंभ होगा तथा प्राप्तकर्ता को कुछ ही सेकंड में भारतीय रुपये (INR) में राशि प्राप्त होगी।
प्रमुख विशेषताएँ एवं लाभ
यह भुगतान प्रणाली रियल-टाइम सीमा-पार धन हस्तांतरण, स्वचालित मुद्रा रूपांतरण तथा मोबाइल बैंकिंग आधारित सुरक्षित लेनदेन की सुविधा प्रदान करती है। प्रारंभिक चरण में यह सेवा बैंक ऑफ मालदीव PLC तथा मालदीव इस्लामिक बैंक PLC के ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराई गई है। इससे पारंपरिक बैंकिंग माध्यमों की तुलना में धन प्रेषण अधिक तेज, सरल और कम लागत वाला होगा।
संस्थागत सहयोग एवं कार्यान्वयन
इस परियोजना को सफल बनाने में मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (MMA), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) तथा दोनों देशों के वाणिज्यिक बैंकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जुलाई 2025 में NIPL और MMA के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके बाद परीक्षण, प्रमाणीकरण तथा बैंक एकीकरण की प्रक्रिया पूरी कर जुलाई 2026 में इस सेवा को शुरू किया गया।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह पहल भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure - DPI), फिनटेक कूटनीति (FinTech Diplomacy) तथा पड़ोसी प्रथम (Neighbourhood First Policy) नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में UPI, NPCI, NIPL, RBI, सीमा-पार भुगतान प्रणाली तथा भारत–मालदीव संबंध से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन, क्षेत्रीय सहयोग और डिजिटल कूटनीति के संदर्भ में इसका विश्लेषण महत्वपूर्ण है।