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भारतीय सेना का एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल: अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में सैन्य गतिशीलता और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती

Published 4 August 2026

भारतीय सेना ने अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में सैन्य वाहनों के संचालन के लिए स्वदेशी Extreme Weather Grade (XWG) Diesel को शामिल किया है, जो –42°C तक भी प्रभावी रूप से कार्य करता है। यह ईंधन पूर्वी लद्दाख, सियाचिन जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक डीजल से जुड़ी समस्याओं को दूर कर सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस और ऑल-वेदर मोबिलिटी को मजबूत करेगा। BS-VI एवं IS 1460:2025 मानकों के अनुरूप विकसित यह तकनीक आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। XWG डीजल का उपयोग T-90, T-72, BMP-2K, K-9 वज्र सहित प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्मों में किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य संचालन और रखरखाव क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

भारतीय सेना ने Extreme Weather Grade (XWG) Diesel को शामिल किया है, जो अत्यधिक कम तापमान वाले क्षेत्रों में सैन्य वाहनों के संचालन के लिए विशेष रूप से विकसित स्वदेशी ईंधन है। यह ईंधन –42°C तक भी तरल अवस्था में कार्य करता है, जबकि सामान्य डीजल अत्यधिक ठंड में गाढ़ा होकर ईंधन लाइन एवं फिल्टर को अवरुद्ध कर देता है। XWG डीजल BS-VI तथा IS 1460:2025 मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।

रणनीतिक आवश्यकता एवं महत्व

पूर्वी लद्दाख, सियाचिन तथा अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अत्यधिक कम तापमान के कारण पारंपरिक डीजल के जमने से सैन्य अभियानों में कठिनाई आती थी। इस कारण इंजन स्टार्ट होने में समस्या, रखरखाव लागत में वृद्धि तथा युद्धक तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। XWG डीजल इन चुनौतियों का समाधान प्रदान कर भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस (Operational Readiness) और ऑल-वेदर मोबिलिटी (All-weather Mobility) को मजबूत करेगा।

स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी एवं आत्मनिर्भर भारत

XWG डीजल का विकास भारत की प्रमुख तेल कंपनियों के सहयोग से स्वदेशी तकनीक द्वारा किया गया है। यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत', स्वदेशी रक्षा उत्पादन तथा रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह आयातित विशेष ईंधनों पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करने का उदाहरण भी है।

सैन्य उपयोग एवं परिचालन लाभ

यह ईंधन भारतीय सेना के प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्मों जैसे T-90 टैंक, T-72 टैंक, BMP-2K पैदल सेना लड़ाकू वाहन, K-9 वज्र स्व-चालित हॉवित्जर तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संचालित रसद एवं परिवहन वाहनों के लिए उपयुक्त है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मौजूदा इंजनों में किसी तकनीकी संशोधन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इसे शीघ्रता से सेना के बेड़े में लागू किया जा सकता है।

उच्च ऊँचाई पर रक्षा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

भारतीय सेना ने न्योमा और दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे लगभग 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित उच्च स्तरीय रखरखाव केंद्र स्थापित किए हैं। XWG डीजल के उपयोग से इन क्षेत्रों में तैनात बख्तरबंद वाहनों की रखरखाव क्षमता, त्वरित तैनाती और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य संचालन की निरंतरता को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह भारत की उत्तरी सीमाओं पर सामरिक तैयारी को सुदृढ़ करता है।

UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व

यह समाचार रक्षा आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा तथा दोहरे उपयोग (Dual-use Technology) के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया (रक्षा क्षेत्र), DRDO, BS-VI ईंधन मानक, भारत की उच्च हिमालयी सैन्य तैनाती, तथा LAC एवं LOC के सामरिक महत्व का समग्र अध्ययन करना चाहिए। यह विषय GS Paper-III (Science & Technology, Defence, Internal Security) के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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